TCP का फुल फॉर्म क्या है? – TCP full form in Hindi & English

TCP का फुल फॉर्म क्या है? – TCP full form in Hindi & English:- TCP की फुल फॉर्म “Transmission Control protocol” होता है और इसे हिंदी में “ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल” भी कहा जाता है। यह नियमों का ग्रुप (Set of Rules) होता है जिसकी मदद से इंटरनेट काम करता है। TCP की मदद से दो कम्प्यूटर्स के बीच जानकारी को ट्रांसफर कराया जाता है। इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किसी भी प्रकार के डाटा को एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस पर सुरक्षित भेजने के लिए किया जाता है।

TCP की मदद से डाटा की फाइल को छोटे-छोटे हिस्सों में अलग किया जाता है। आपको बता दें कि TCP हार्डवेयर सभी प्रकार के ऑपरेटिंग सिस्टम में समान होता है। हम अपने मोबाइल या डिवाइस के जरिये इंटरनेट से किसी भी जानकारी को कुछ ही सेकंड में आसानी से प्राप्त कर सकते है।

TCP का फुल फॉर्म क्या है? – TCP full form in Hindi & English

TCP का फुल फॉर्म क्या है? – TCP full form in Hindi & English

TCP किस प्रकार काम करता है (How does TCP work in Hindi)

ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल डाटा की फाइल को छोटे-छोटे हिस्सों में अलग कर देता है और फिर उसे इंटरनेट पर सेंड कर देता है और फिर IP की मदद से डाटा को जिस जगह भेजना होता है वह आसानी से उसको वहां पहुंचा देता है। इस प्रकार नेटवर्क और इंटरनेट के बीच एक कनेक्शन बन जाता है लेकिन बिना इंटरनेट के किसी भी फाइल को न तो डाउनलोड किया जा सकता है और न ही किसी को भेजी जा सकती है।

TCP मॉडल में कितनी लेयर मौजूद होती है (How many layers are in the TCP model in Hindi)

इसकी मुख्य रूप से 4 लेयर होती है जो कि निम्न प्रकार है।

  1. Application layer – यह लेयर TCP मॉडल की सबसे ऊपरी लेयर होती है। इसका काम कम्युनिकेशन उपलब्ध कराना होता है और यह लेयर Transport layer को डाटा भेजने में इस्तेमाल की जाती है और Transport layer से डाटा रिसीव भी करती है। यह TCP मॉडल की ऊपरी लेयर होने के कारण high level protocols को हैंडल करती है।
  2. Transport layer – यह लेयर TCP मॉडल की दूसरी लेयर होती है जो Application layer और Internet Layer के बीच मौजूद होती है। इसका काम डाटा का Correction, Reliability और Flow Control करना होता है। जब किसी भी प्रकार का कोई डाटा Application layer से Transport layer में आता है तो उस डाटा को सेगमेंट के रूप में अलग कर दिया जाता है। अब इसके बाद डाटा को सेगमेंट के रूप में ही एक स्थान से दूसरे स्थान भेजा जाता है। आपको बता दें कि Transport layer में भी दो प्रकार के प्रोटोकॉल होते है जो कि कार्य करते है।
  • यूजर डाटा ग्राम प्रोटोकॉल (UDP)
  • ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रोटोकॉल (TCP)
  1. Internet Layer – यह इस मॉडल की तीसरी लेयर होती है जो Application layer और Transport layer के बीच उपलब्ध होती है। इस लेयर में डाटा को डाटाग्राम के रूप में रखा जाता है और यह डाटा ग्राम सिर्फ और सिर्फ डाटाग्राम सोर्स और डेस्टिनेशन के आईपी एड्रेस के लिए होता है। इस लेयर की मदद से डाटा को किसी भी समय एक डिवाइस से दूसरे डिवाइस में आसानी से भेजा सकता है और आसानी से रिसीव भी किया जा सकता है।
  2. Network layer – यह इस मॉडल की मुख्य लेयर है और इसको नीचे की लेयर भी कहा जाता है क्योंकि यह इस मोडल की सबसे आखिरी लेयर होती है। इस नेटवर्क लेयर की मदद से एक ही नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाले दो अलग-अलग डिवाइसों के डाटा को आसानी से ट्रांसफर किया जा सकता है।

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TCP मॉडल के क्या नुकसान है (What are the disadvantages of TCP model in Hindi)

  • इस टाइप के मॉडल को सेटअप करना और मैनेज करना बहुत ही मुश्किल होता है।
  • TCP मॉडल में जिन ट्रांसपोर्ट लेयर का इस्तेमाल किया जाता है उनकी पैकेजों की डिलीवरी की गारंटी नहीं होती है।
  • किसी भी प्रकार के दूसरे एप्लीकेशन में इस मॉडल को इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है।

TCP और और OSI मॉडल के बीच क्या अंतर है (What is the difference between TCP AND and OSI model in Hindi)

  • TCP मोडल में 4 लेयर और OSI मॉडल में 7 लेयर होती है।
  • टीसीपी मॉडल को 1970 में और OSI मॉडल को 1980 में बनाया गया था।
  • टीसीपी मॉडल का काम हॉरिजॉन्टल अप्रोच को फॉलो करना होता है और OSI मॉडल का काम वर्टिकल अप्रोच को फॉलो करना होता है

TCP मॉडल की क्या-क्या विशेषता है (What are the characteristics of TCP model in Hindi)

  • इस मॉडल की मदद से कई अलग-अलग तरह के कंप्यूटर को आपस में कनेक्ट किया जा सकता है।
  • इस मॉडल की मुख्य विशेषता यह है कि यह दो डिवाइसों के बीच कनेक्शन बनाता है।
  • TCP मॉडल का इस्तेमाल कोई भी कर सकता है। यह एक ओपन मॉडल है।

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